बिपिन रावत. भारत के पहले चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ (CDS) हैं. उन्होंने इंडिया टुडे से बातचीत में ऐसी बात कही, जिससे आर्मी और वायु सेना के वैचारिक मतभेद सामने आ गए. खबर के मुताबिक, CDS बिपिन रावत ने इंडियन एयर फ़ोर्स (IAF) को ‘सपोर्ट आर्म ऑफ़ आर्मी’ यानी थल सेना की सहायक सेना (या इकाई) बताया है.
इस पर एयर फ़ोर्स ने तुरंत ने अपनी बात रखी. IAF प्रमुख राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने इंडिया टुडे से बातचीत में बिपिन रावत के बयान को एक तरह से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा है कि इंडियन एयर फ़ोर्स, इंडियन आर्मी की सपोर्ट आर्म नहीं है. ये वैचारिक मतभेद ऐसे समय में सामने आया है कि जब सेनाओं के थियेटर इंटीग्रेशन का समय नजदीक है.
बिपिन रावत ने क्या कहा?
बिपिन रावत ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा,
“वायु सेना से ग्राउंड पर मौजूद सुरक्षा बलों को सपोर्ट देने की अपेक्षा की जाती है. ये मत भूलिए कि वायु सेना ग्राउंड फोर्स की सपोर्टिंग आर्म रहेगी. ठीक उसी तरह जैसे तोपखाना, सेना में लड़ाकू हथियारों का सपोर्ट करती है. वे सपोर्ट आर्म होंगे, लेकिन उनके पास एक चार्टर है. उनके पास एक डिफेंस चार्टर है, जो ऑपरेशंस के वक्त ग्राउंड फ़ोर्स को सपोर्ट करता है. यह मूल चार्टर है जिसे उन्हें समझना है.”
इंडिया टुडे का विडियो ट्वीट देखिए.
रावत के बयान पर एयर फ़ोर्स ने क्या कहा?
बिपिन रावत के बाद इंडिया टुडे ने आरकेएस भदौरिया का इंटरव्यू किया. इसमें उन्होंने कहा कि एयर फ़ोर्स, सपोर्ट आर्म नहीं है. IAF चीफ भदौरिया ने कहा,
“हमारे अपने लक्ष्य हैं. हम एयर आर्टिलरी नहीं हैं.”
उन्होंने आगे कहा,
“एयर फोर्स को सिर्फ ग्राउंड फ़ोर्स के सपोर्ट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. भविष्य के युद्धों को देखिए. दुनिया के किसी युद्ध में अब सबसे पहले एयर फ़ोर्स हिस्सा लेती है. ग्राउंड फोर्सेज से भी पहले जाकर खतरे को कम करती है ताकि ग्राउंड फोर्सेज को आसानी हो. एयर फ़ोर्स, ग्राउंड फोर्सेज को सपोर्ट नहीं करती, ग्राउंड फोर्सेज की अगुआ रहती है.”
तीनों सेनाओं के तालमेल पर उठे सवाल?
किसी भी देश में सेना एक ताकतवर संस्थान है. सरकारें उन्हें अपने मातहत ही रखना चाहती हैं. CDS को लेकर सरकारों को ये डर रहा कि ये पद कहीं बहुत ज़्यादा ताकतवर न हो जाए. जब भारत में लगातार गठबंधन सरकारें बन रही थीं, तब ये डर खास तौर पर हावी रहा. लेकिन मोदी सरकार ने CDS पोस्ट बनाई. इसलिए बनाई ताकि तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल रहे. क्योंकि करगिल युद्ध के बाद इस तरह की रिपोर्ट्स आईं थी कि थल सेना और वायु सेना के बीच बेहतर तालमेल की कमी थी.
वहीं, बालाकोट हमले से जुड़ी कमियों ने भी CDS की जरूरत की तरफ सरकार का ध्यान खींचा. इसलिए मोदी सरकार में पहली बार CDS पोस्ट बनी और बिपिन रावत को इस पर बिठाया गया. अब एयर फ़ोर्स को लेकर उनके कमेंट्स पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि मीडिया में इस तरह के बयान बताते हैं कि तीनों सेनाओं के इंटीग्रेशन को लेकर कहीं न कहीं कुछ दिक्कतें हैं. और इस तरह की दिक्कतों को जल्द से जल्द ठीक कर लिया जाना चाहिए.



