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फिल्म छोरी की समीक्षा — मीना कौशल

Meena Kaushal: हाल ही में आई “छोरी” फिल्म दे मराठी फिल्म “लपाछपी” का आधिकारिक रिमेक है। कन्या भ्रूण हत्या पर बनी यह फिल्म आपको प्रभावित अवश्य करेगी और आपको सोचने पर मजबूर कर देगी। हालांकि इसकी कहानी में कुछ लूपहोल्स हैं जिन्हें समझने में आम दर्शकों को कठिनाई हो सकती है।

फिल्म के कलाकारों में सभी ने अच्छा काम किया है, विशेष तौर पर यह फिल्म अभिनेत्री नुसरत भरुचा के कैरियर का मील का पत्थर मानी जाएगी। ये जरूर है कि मीता वशिष्ठ जैसी अदाकारा इससे बेहतर कर सकती थी।

कहानी एक शहर से शुरू होती है, जहां साक्षी(नुसरत भरूचा) 8 महीने की प्रेग्नेंट है और पति हेमंत( सौरभ गोयल) के साथ रहती है।एक रात कुछ गुंडों से बचने के लिए हेमंत को रातों-रात साक्षी के साथ शहर छोड़ना पड़ता है। हेमंत का ड्राइवर कजला( राजेश जैस)उन्हें उसके गांव जाने का सुझाव देता है ताकि उन्हें गुंडे ना ढूंढ पाएं। कोई और विकल्प न होने के कारण वे उस गांव में पहुंच जाते हैं ।गन्ने के खेतों की भूलभुलैया के बीच एक घर बना हुआ होता है जहां भानु देवी( मीता वशिष्ठ) की एंट्री होती है जो कजला की पत्नी भी है। वह साक्षी का अच्छी तरह से ध्यान रखती है किंतु उसकी पुरातन और रूढ़िवादी सोच साक्षी को अच्छी नहीं लगती। हेमंत को किसी काम से कजला के साथ शहर जाना पड़ता है। साक्षी अब भूल भुलैया में अकेली रह जाती है। वहां एक गूंगी औरत रानी भी नजर आती है जिसके पेट पर कट का निशान है। धीरे-धीरे साक्षी को तीन बच्चे और एक औरत भी दिखाई देने लगती है। भानु देवी इसे साक्षी का भ्रम बताकर उनसे दूर रहने की सलाह देती है। साक्षी अपने साथ हो रहे अजीब अनुभवों से डर जाती है।वह गन्नों के खेतों की भूलभुलैया से रात भर बाहर निकलने की कोशिश करती है किंतु हर बार असफल हो जाती है। फिल्म के कुछ दृश्य आपको 2019 में आई हॉलीवुड फिल्म “In the tall grass” की याद दिलाएंगे ।

क्या साक्षी आत्माओं के बीच और भानू देवी के खतरनाक इरादों से बच कर  निकल पाएगी ?यह जानने के लिए फिल्म देखना तो बनता है। जहां तक फिल्म की भयावहता की बात है। हिंदी फिल्मों में” परी” और “तुम्बाड़” इससे बेहतर थी ।यदि आप सिर्फ हॉरर के लिए फिल्म देखना चाहते हैं तो आप अतृप्त रह जाएंगे ।

वैसे तो भारत में कन्या भ्रूण हत्या की कुरीति सदियों से चली आ रही है किंतु फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए यह सब अविश्वसनीय सा लगता है। कुछ सवाल.. जैसे आत्माएं खलनायको को मारने की जगह साक्षी को क्यों डराती हैं? समझ से परे है ।ऐसे परिवेश में कैसे पता चलता है कि अजन्मा बालक कन्या है।कैसे कोई औरत स्वयं अपना पेट चीर कर बच्चा निकाल सकती है और उसके बाद भी जीवित रहती है? यहां तक कि आखिर में यह भी नहीं दिखाया गया कि साक्षी की बेटी होती है या बेटा.. कुछ दृश्यों में भ्रम और सच की रेखा मिट जाती है और दर्शक कंफ्यूज हो जाता है ।

फिर भी फिल्म 10 में से आठ नंबर प्राप्त करने की योग्यता रखती है, तो परिवार के साथ इसे अवश्य देखें फिल्म में बार-बार बजने वाली लोरी”लुका छिपी” मधुर होने के साथ-साथ रहस्यमई भी लगती है ।फिल्म के अंत में बजने वाला गाना”ओ री चिरैया” जो कि आमिर खान के शो “सत्यमेव जयते” से लिया गया है कर्ण प्रिय होने के साथ-साथ हृदय को द्रवित कर देता है।  अंततः छोरी फिल्म 2021 की बेहतरीन फिल्मों में से एक है।

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