अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कल्याण पर विचार कर रही संसदीय समिति ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। समिति ने कहा कि ओबीसी समुदाय के भीतर “क्रीमी लेयर” (सामाजिक रूप से उन्नत वर्ग) को तय करने के लिए 8 लाख की आय सीमा को बढ़ाना अब “समय की मांग” है। समिति ने यह भी कहा कि यह सीमा पिछले सात साल से तय है और यह अब “कम” हो चुकी है, जो केवल “ओबीसी के एक छोटे हिस्से” को कवर करती है। भाजपा सांसद गणेश सिंह की अध्यक्षता वाली इस समिति ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह सभी संबंधित पक्षों से परामर्श करने के बाद क्रीमी लेयर आय सीमा को काफी अधिक बढ़ाने के लिए कदम उठाए। इससे ओबीसी समुदाय के अधिक से अधिक लोग आरक्षण नीति और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
वर्ष 1992 में सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी फैसले के बाद ओबीसी के भीतर “क्रीमी लेयर” की अवधारणा पेश की गई थी, ताकि सामाजिक रूप से उन्नत व्यक्तियों को सरकारी लाभ से बाहर रखा जा सके। शुरू में वर्ष 1993 में क्रीमी लेयर आय सीमा 1 लाख तय की गई थी, जिसे समय-समय पर बढ़ाया गया। आखिरी बार वर्ष 2017 में इसे 8 लाख निर्धारित किया गया था। संसदीय समिति ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) और सामाजिक न्याय मंत्रालय से संबंधित ओबीसी के लिए योजनाओं और आरक्षण पर कई रिपोर्ट प्रस्तुत की है। समिति ने यह सिफारिश भी की है कि सरकार केंद्रीय नौकरी कोटे के कार्यान्वयन पर डेटा को वार्षिक रिपोर्टों में शामिल कर उसे वेबसाइट पर सार्वजनिक करें। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
समिति ने यह भी बताया कि क्रीमी लेयर आय सीमा की गणना राज्यों में अलग-अलग तरीके से की जाती है, जैसे कि आय के किन-किन स्रोतों को शामिल किया जाए। समिति ने केंद्र सरकार को यह सलाह दी है कि वह राज्यों से बात करके एक समान फॉर्मूला अपनाने की कोशिश करें। समिति ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र को राज्यों के साथ मिलकर एक समान प्रक्रिया लागू करनी चाहिए, ताकि ओबीसी समुदाय के लिए योजनाओं का समान और प्रभावी कार्यान्वयन हो सके। यह रिपोर्ट अब लोकसभा में पेश की गई है और इसके परिणामस्वरूप क्रीमी लेयर आय सीमा बढ़ाने को लेकर आगे के कदम उठाए जा सकते हैं।



