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सरकार के टीकाकरण प्लान के बाद भी क्यों पिछड़ रहा है भारत ?

भारत को दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू किए छह महीने पूरे हो गए हैं, लेकिन जितनों को वैक्सीन देने की बात थी, अब तक उस आबादी के क़रीब पांच प्रतिशत लोगों को ही वैक्सीन मिल पाई है.

फिलहाल भारत एक दिन में 40 लाख लोगों का टीकाकरण कर रहा है, लेकिन साल के आख़िर तक टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करने के लिए सरकार को हर दिन में 80 से 90 लाख लोगों को वैक्सीन देनी होगी.

जनवरी में एक आशाजनक शुरुआत के बावजूद टीकाकरण अभियान हाल के महीनों में धीमा पड़ा है, जिसकी वजह वैक्सीन की सप्लाई का कम होना और नई वैक्सीन के इस्तेमाल को मंज़ूरी मिलने में देरी होना है.

ज़्यादातर देश, जिनमें अधिकतर विकासशील देश शामिल हैं, वो कोरोना वैक्सीन हासिल करने के लिए जूझ रहे हैं. लेकिन टीकाकरण अभियान की शुरूआत में ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा था कि दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता, भारत भी इस तरह की चुनौती का सामना कर सकता है.

लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने वैक्सीन निर्माताओं को वक्त से पहले ऑर्डर नहीं दिया. अप्रैल में आई कोरोना की दूसरी घातक लहर की वजह से उन्हें अपने अभियान का दायरा जल्दी ही पूरी व्यस्क आबादी के लिए बढ़ाना पड़ा. ये संख्या क़रीब एक अरब है.

भारत का टीकाकरण अभियान कैसा चल रहा है?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 16 जनवरी से अब तक भारत में वैक्सीन की 39.93 करोड़ से ज़्यादा डोज़ लगाई गई है. क़रीब 31 करोड़ 20 लाख लोगों को अब तक वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी है जबकि 7 करोड़ 70 लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन की सिर्फ एक डोज़ लगी है.

शुक्रवार को भारत में कोरोना संक्रमण के 38,949 नए मामले दर्ज किए गए – जो मई महीने के शुरुआत में आए दूसरी लहर के पीक के केसलोड के दसवें हिस्से से भी कम है.

लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि तीसरी लहर का आना तय है क्योंकि नए कोरोना वायरस वेरिएंट्स के ख़तरों के बावजूद पाबंदियों को पूरी तरह हटा लिया गया है. वैक्सीन डोज़ की रोज़ाना की औसत संख्या में आई गिरावट ने भी विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है.

इसमें एक जेंडर गैप भी है – सरकारी डेटा के अनुसार है कि 14 फीसदी से कम महिलाओं को टीका लग रहा है. ग्रामीण भारत में ऐसा ज़्यादा देखा जा रहा है जहां इंटरनेट तक महिलाओं की सीमित पहुंच है और वो टीका लेने से हिचकिचाती या डरती हैं. इसके मुक़ाबले शहरी इलाक़ों में टीकाकरण की दर ज़्यादा है. ये भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था तक पहुंच में असमानता को दिखाता है.

राजधानी दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सवाल किया, “हमारे देश का वैक्सीन प्रोग्राम इतने दिनों बाद भी क्यों लड़खड़ा रहा है?” मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को बताया कि शहर में वैक्सीन की डोज़ ख़त्म हो गई है, जिसकी वजह से कई सरकारी सेंटरों को बंद करना पड़ रहा है.

जून में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि अगस्त से दिसंबर के बीच वैक्सीन की 1.35 अरब डोज़ उपलब्ध होंगी और भारत में सभी योग्य व्यस्कों का टीकाकरण करने के लिए सरकार को वैक्सीन के क़रीब 1.8 अरब डोज़ की ज़रूरत होगी.

अदालत में दिए हलफनामे में सरकार ने ये बताया था कि अगस्त से दिसंबर के बीच पांच कंपनियों की कोरोना वैक्सीन की कितनी डोज़ उपलब्ध होगी.

सरकार ने कहा था कि कोविशील्ड वैक्सीन की 50 करोड़ डोज़, कोवैक्सीन की 40 करोड़, भारतीय कंपनी बायलॉजिकल ई के वैक्सीन की 30 करोड़, रूसी स्पुतनिक वी वैक्सीन की 10 करोड़ और अहमदाबाद स्थित ज़ायडस-कैडिला के ZyCov-D के कोरोना वैकेसीन की 5 करोड़ डोज़ उपलब्ध होंगी.

लेकिन वैक्सीन के आपूर्ति की कमी लगातार बनी हुई है और रिपोर्टों की मानें तो जुलाई में ये अभियान अपने लक्ष्य से पिछड़ सकता है.

भारत कौन-सी वैक्सीन इस्तेमाल कर रहा है?

भारत में फिलहाल टीकाकरण के लिए तीन कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल को मंज़ूरी मिली है- ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन, जिसे स्थानीय तौर पर कोविशील्ड कहा जा रहा है; भारतीय कंपनी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन; और रूस में बनी स्पुतनिक वी.

सरकार ने भारतीय फार्मा कंपनी सिप्ला को भी मॉडर्ना की वैक्सीन आयात करने के लिए अधिकृत किया है. क्लिनिकल स्टडीज़ में ये वैक्सीन कोविड-19 के ख़िलाफ़ लगभग 95 फीसदी प्रभावकारी पाई गई है. लेकिन ये अभी साफ़ नहीं है कि भारत में इसकी कितनी डोज़ उपलब्ध होंगी.

कई और कोरोना वैक्सीन भी अप्रूवल की अलग-अलग स्टेज पर है.

देश में टीकाकरण स्वैच्छिक है यानी जो टीका लगवाना चाहे वही लगवाए. सरकारी क्लीनिक और अस्पतालों में मुफ़्त में कोरोना वैक्सीन दी जा रही है, लेकिन लोग भुगतान करके प्राइवेट अस्पतालों में भी लोग इसकी डोज़ ले सकते हैं.

सरकारी क्लीनिक, स्वास्थ्य सेवा केंद्र और अस्पतालों में फ्री डोज़ मुहैया कराने के लिए सरकार क़रीब 5 अरब डॉलर का खर्च कर रही है.

क्या वैक्सीन लेने के बाद कोई साइड इफेक्ट हुए हैं?

वैक्सीन लेने के बाद लोगों में बुख़ार, बांह में दर्द, वैक्सीन लगवाने की जगह पर दर्द, सरदर्द जैसे साइड इफेक्ट हो सकते हैं. भारत में टीकाकरण के बाद “एडवर्स इवेंट्स” की निगरानी के लिए 34 साल पुराना सर्विलांस प्रोग्राम है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों को पारदर्शी रूप से रिपोर्ट करने में विफल रहने से वैक्सीन को लेकर डर पैदा हो सकता है.

भारत में 17 मई तक टीकाकरण के बाद 23,000 से अधिक “एडवर्स इवेंट्स” दर्ज किए गए हैं. इनमें से ज़्यादातर को ‘मामूली’ साइड इफेक्ट के तौर पर वर्गीकृत किया गया है. इनमें घबराहट, सर चकराना, चक्कर आना, बुखार और दर्द शामिल है.

भारत सरकार ने ‘गंभीर साइड इफेक्ट’ के करीब 700 मामलों की भी जांच की है और जून के मध्य तक 488 मौतें की जानकारी दी है. हालांकि सरकार ने कहा है कि इसका मतलब ये नहीं है कि टीकाकरण की वजह से ऐसा हुआ.

साथ ही सरकार ने कहा है कि “कोविड-19 बीमारी से मरने के ख़तरे की तुलना में वैक्सीन के बाद मरने का ख़तरा बहुत ही कम है.”

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