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वैक्सीन की इतनी किल्लत के बाद सरकार का मुफ्त टीकाकरण कितनी हद तक संभव है ?

राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल, ये वो राज्य हैं जहां बीजेपी की सरकार नहीं है. इन पांचों राज्यों का कहना है कि केंद्र सरकार ने भले ही घोषणा की हो कि टीकाकरण के तीसरे चरण में 18 साल और उससे ऊपर की आयु वाले 1 मई से टीका लगवा सकेंगे लेकिन इसमें देरी होगी.

द हिंदू की ख़बर के मुताबिक़, इन राज्यों का कहना है कि वैक्सीन निर्माताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार के साथ अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने के बाद ही वे भविष्य के ऑर्डर पर बातचीत कर सकते हैं.

राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि जब राजस्थान सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट से संपर्क साधा तो उन्हें बताया गया कि 15 मई तक वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो सकेंगी.

रघु शर्मा के हवाले से अख़बार लिखता है कि “सीरम इंस्टीट्यूट ने हमें बताया कि 15 मई तक तो वे केंद्र सरकार के पहले के दिए ऑर्डर को ही संभवत: पूरा नहीं कर पाएंगे.”

ग़ैर-बीजेपी शासित राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रघु शर्मा ने यह बात कही. इस कॉन्फ्रेंस में छत्तीसगढ़ के टी सिंह देव, पंजाब के बलबीर सिंह सिद्धू और झारखंड के बन्ना गुप्ता शामिल थे.

रघु शर्मा ने बताया कि राज्य सरकारों ने वैक्सीन के लिए जो ऑर्डर दिये हैं उनकी प्रक्रिया 15 मई के बाद ही शुरू हो पाएगी. उन्होंने कहा कि “जब टीके हैं ही नहीं तो हम 19 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को टीके लगाएं कैसे?”

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्यमंत्री टीएस सिंह देव ने मोदी सरकार पर सभी लोगों के साथ मज़ाक करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार लोगों को गुमराह कर रही है और लोगों के गुस्से को राज्य सरकारों की ओर मोड़ने का प्रयास कर रही है.”

उन्होंने कहा कि तीसरे चरण के टीकाकरण की घोषणा करने से पहले केंद्र को सप्लाई चेन का पता लगाना चाहिए था.

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि “पंजाब की स्थिति पहले से ही बुरी है. हम पहले से ही वैक्सीन की किल्लत से जूझ रहे हैं.”

केरल भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहा है. केरल के पास मौजूदा समय में सिर्फ़ चार लाख डोज़ेज़ ही बची हैं और उसने अभी से कम संख्या में वैक्सीनेशन करना शुरू कर दिया है और ये सिर्फ़ वैक्सीन की किल्लत के कारण है.

भले ही 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए एक मई से टीकाकरण शुरू हो जाएगा लेकिन इन राज्यों ने स्पष्ट कर दिया है कि इस समूह के लिए टीकाकरण तभी शुरू किया जाएगा जब स्टॉक उपलब्ध होगा.

एक दिन में छह लाख केस के लिहाज़ से करें तैयारी

क़रीब दस दिन पहले ही नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल के नेतृत्व वाले अधिकारियों के एक समूह ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मत्रालय समेत संबंधित अधिकारियों को बताया था कि 20 अप्रैल तक प्रतिदिन 3 लाख संक्रमण के मामलों को ध्यान में रखते हुए ऑक्सीजन की उपलब्धता के त्वरित उपाय करने चाहिए.

साथ ही ये भी बताया था कि अप्रैल महीने के अंतिम के दिनों में पांच लाख प्रति दिन का उछाल आ सकता है.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, डॉ पॉल महामारी से निपटने के लिए तैयार की गई सरकारी कोर टीम के सदस्य भी हैं औैर उन्होंने ‘प्लान-बी’ के तहत यह भी सिफ़ारिश की थी ऑक्सीजन की आपूर्ति को बढ़ाने के लिए असाधारण उपाय किये जाने की ज़रूरत है ताकि जब एक दिन में जब छह लाख मामले आएं तो स्थिति को संभाला जा सके.

कोरोना की जांच के मनमाने दाम ले रहे हैं लैब

दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इस बीच एक ओर जहां दवाइयों, ऑक्सीजन और अस्पताल में बेड की किल्लत से लोग जूझ रहे हैं और दोगुने से अधिक दाम देने को मजबूर हैं वहीं कोरोना की जांच को लेकर भी कुछ ऐसा ही हाल है.

दैनिक हिंदुस्तान की ख़बर के अनुसार, कोरोना के मामले इतने अधिक आ रहे हैं कि सरकारी समेत निजी अस्पतालों में भी जांच के लिए लंबी लाइनें लग रही है. ऐसे में लोग निजी केंद्र में जांच कराने को मजबूर हैं जहां उनसे मनमाने दाम लिए जा रहे हैं. जो सीटी स्कैन आमतौर पर 15सौ से 18सौ में हो जाता है उसके लिए आम आदमी को पांच से सात हज़ार रुपये देने पड़ रहे हैं.

दोगुने से अधिक दाम देने के बावजूद रिपोर्ट आने में चार से पांच दिन का समय लग जा रहा है. कोरोना की आरटीपीसीआर जांच के लिए भी लोगों को दो हज़ार से तीन हज़ार रुपये तक देने पड़ रहे हैं.

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