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टोक्यो ओलंपिक: क्या आज महिला हॉकी टीम रच पाएगी अपना इतिहास ?

भारतीय महिला हॉकी टीम इतिहास रचने से महज़ एक जीत दूर है.

ओलंपिक खेलों में भारत अब तक महिला हॉकी में कोई मेडल हासिल नहीं कर सका है, ऐसे में टोक्यो के ओइ हॉकी स्टेडियम में भारतीय टीम बुधवार को इतिहास बनाने के लिए उतरेगी. काग़ज़ पर कहीं मज़बूत अर्जेंटीना को अगर भारतीय महिला टीम हराने का करिश्मा कर पाई तो उसका कम से कम सिल्वर मेडल पक्का हो जाएगा.

वैसे भारतीय महिला टीम के लिए सेमीफ़ाइनल में पहुंचना भी बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि टीम पहली बार सेमीफ़ाइनल में पहुंचने में कामयाब रही है. चार दशकों के बाद महिला के साथ साथ पुरुष टीम भी टोक्यो में अंतिम चार में पहुंचने में कामयाब रही. लेकिन पुरुष हॉकी में बेल्जियम ने भारत को फ़ाइनल से पहले ही रोक दिया है. ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या महिला टीम वह करिश्मा कर पाएगी जो पुरुष टीम नहीं कर सकी?

भारतीय महिला टीम ने तीसरी बार ओलंपिक में हिस्सा लिया है. 1980 के मास्को ओलंपिक में पहली बार महिला हॉकी को शामिल किया गया. भारतीय टीम वहां चौथे पायदान पर रही थी. इसके बाद ओलंपिक में अगली बार खेलने के लिए भारत को 36 साल तक इंतज़ार करना पड़ा. रियो ओलंपिक में भारतीय महिला टीम कोई मुक़ाबला नहीं जीत सकी और उसे अंतिम स्थान से संतोष करना पड़ा था.

ख़राब शुरुआत के बाद वापसी

टोक्यो में भारत की शुरुआत बेहद ख़राब रही. भारतीय महिला हॉकी टीम को अपने पहले तीनों मुक़ाबले में हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद टीम के डच कोच शॉर्ड मारिन ने टीम की आलोचना की. उन्होंने यहां तक कहा कि टीम वह कर रही है जिसके लिए टीम प्रबंधन मना कर रहा है यानी खिलाड़ी व्यक्तिगत तौर पर खेल रही हैं, टीम के रूप में नहीं.

ऐसे में जब हर किसी को आशंका होने लगी थी कि भारतीय महिला टीम इस बार रियो ओलंपिक की तरह अंतिम पायदान पर रहेगी, तभी खिलाड़ियों ने अपने गियर बदले. टीम ने पहले आयरलैंड को हराया और इसके बाद साउथ अफ़्रीका को हराकर क्वार्टर फ़ाइनल में प्रवेश किया. क्वार्टर फ़ाइनल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ ज़ोरदार जीत हासिल करके सेमीफ़ाइनल में प्रवेश किया.

वहीं दूसरी ओर अर्जेंटीना ने क्वार्टर फ़ाइनल में जर्मनी को 3-0 से हराया है. वैसे अर्जेंटीना की शुरुआत भी हार से हुई थी, जब न्यूज़ीलैंड ने उन्हें हरा दिया था, इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था.

लेकिन जर्मनी को जिस तरह से अर्जेंटीना ने हराया है, उससे ज़ाहिर होता है कि उनकी फ़ारवर्ड कहीं ज़्यादा आक्रामकता से खेल रही हैं. इतना ही नहीं, उनमें जीत हासिल करने की भूख भी नज़र आ रही है क्योंकि रियो ओलंपिक में टीम क्वार्टर फ़ाइनल में ही बाहर हो गई थी.

भारत की रणनीति

सेमी फ़ाइनल के अहम मुक़ाबले में भारत की महिला खिलाड़ियों को एक टीम के तौर पर खेलना होगा. इसके अलावा उन्हें उन तरक़ीबों को भी अपनाना होगा जिन्हें खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ अपनाया था.

वैसे तो पेनल्टी कॉर्नर पर गोल दागने में भारत का औसत बहुत ख़राब है, लेकिन टीम ने क्वार्टर फ़ाइनल में मिले मौक़े का फ़ायदा उठाया था. गुरजीत कौर ने बेहतरीन ड्रैग फ़्लिक के ज़रिए जो गोल दागा, वह आख़िर में निर्णायक साबित हुआ. यानी मौक़े पर पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने की काबिलियत फिर से दिखानी होगी. मज़बूत टीमों के सामने ज़्यादा मौके नहीं मिलते हैं, इसलिए उन्हें हर मौके का फ़ायदा उठाना होगा.

अर्जेंटीना की टीम अपने आक्रामक खेल के लिए जानी जाती है, ऐसे में भारतीय रक्षा पंक्ति को मुस्तैद रहना होगा. भारतीय पुरुष हॉकी टीम के गोलकीपर श्रीजेश को ‘दीवार’ कहा जाता है, लेकिन टोक्यो ओलंपिक में महिला हॉकी टीम की गोलकीपर सविता ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मुक़ाबले में ख़ुद को ‘दीवार’ साबित किया. उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के सामने कई शानदार बचाव किए. लेकिन टीम की पूरी रक्षा पंक्ति को मज़बूत रहना होगा.

इसके अलावा टीम के खिलाड़ियों को यह समझना होगा कि जब वे ऑस्ट्रेलिया को हरा सकते हैं तो फिर अर्जेंटीना को भी हरा सकते हैं, क्योंकि ग्रुप मुक़ाबलों में अर्जेंटीना को ऑस्ट्रेलिया से हार का सामना करना पड़ा था.

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