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क्या हैं वे 3 फैक्टर जिनपर टिकी है बंगाल की किस्मत

चुनाव आयोग ने देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा कर दी है. इनमें पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं. यहां आठ चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया गया है. शुक्रवार को चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि पश्चिम बंगाल में 27 मार्च और 1, 6, 10, 17, 22, 26 और 29 अप्रैल को मतदान किया जाएगा. इस घोषणा के साथ बंगाल में आचार संहिता लागू हो गई है. पश्चिम बंगाल में BJP के बढ़ते सियासी कद के चलते इस बार का विधानसभा चुनाव उसके और सत्तारूढ़ में तृणमूल कांग्रेस के बीच कांटे का दिख रहा है. लेकिन जानकार तीन और बड़े फैक्टर्स बताते हैं, जो इस बार के चुनाव को पहले के चुनावों से अलग बनाते हैं.

जाति फैक्टर

इंडिया टुडे के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के चुनाव में इस बार जाति बड़े फैक्टर के रूप में निकलकर आई है. इससे पहले पश्चिम बंगाल के चुनावों में ऐसा नहीं हुआ था. लेकिन इस बार एक ओर जहां मातुआ समुदाय बड़ा फैक्टर साबित हो रहा है वहीं, आदिवासी और कुर्मी समाज पर भी सभी की नजर है. पश्चिम बंगाल में, खास तौर पर नदिया और उत्तर 24 परगना जिले में लगभग डेढ़ करोड़ मातूआ समुदाय के लोग रहते हैं. इस बार दोनों ही पार्टियां इनका वोट लेने की कोशिश में हैं. वहीं जंगलमाहल के जिलों में आदिवासी और कुर्मी समाज का वोट भी बेहद अहम माना जा रहा है.

बाहरी बनाम बंगाली

इस बार के पश्चिम बंगाल चुनाव में ‘बाहरी बनाम बंगाली’ का मुद्दा भी प्रमुख रूप से सामने आया है. इसे बंगाली अस्मिता से भी जोड़कर देखा जाता है. ममता बनर्जी इसका फायदा उठाती दिख रही हैं. वे BJP के नेताओं को बाहरी बता रही हैं. दूसरी तरफ, इसके जवाब में बीजेपी बंगाल के महानायकों को अपने से जोड़ कर दिखाने की कोशिश में जुटी हुई है.

हिंसा

पश्चिम बंगाल चुनाव में इस बार चुनावी हिंसा भी एक बड़ा फैक्टर है. बताया जा रहा है कि बंगाल की राजनीति के ‘रक्त चरित्र’ होने की वजह से ही इस बार 8 चरणों में चुनाव की घोषणा की गई है. चुनाव आयोग के लिए यह बड़ा चैलेंज है कि किस तरह पश्चिम बंगाल के चुनाव को हिंसा मुक्त रखा जाए. पिछली बार पश्चिम बंगाल में छह चरणों में चुनाव हुआ था. उस वक्त भी ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया था और इस बार भी.

8 चरणों से खफा ममता

चुनाव आयोग के ऐलान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति और ज्यादा गर्माने वाली है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसके संकेत भी दे दिए हैं. चुनाव आयोग के तारीखों की घोषणा करने के तुरंत बाद उन्होंने आयोग और BJP पर बड़ी टिप्पणी कर दी. इलेक्शन डेट्स पर सवाल उठाते हुए ममता बनर्जी ने कहा,

‘BJP ने चुनाव आयोग का इस्तेमाल किया है. वह पूरे देश को बांटने में लगी है और बंगाल में यही करेगी. गृह मंत्री और प्रधानमंत्री अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल न करें. बंगाल में 8 चरणों में चुनाव क्यों कराए जा रहे हैं? चुनाव आयोग ने वही किया, जैसा BJP बीजेपी ने कहा. एक ही जिले में दो-तीन चरणों में चुनाव किसलिए?’

ममता ने कहा कि ये सब तरीके काम नहीं आएंगे. उन्होंने बंगाली अस्मिता का मुद्दा भी उछाल दिया. यह कहकर कि ‘बंगाल में बंगाली ही राज करेगा, हम बीजेपी को हराकर रहेंगे’.

उधर, BJP ने बंगाल चुनाव को 8 चरणों में कराए जाने को लेकर अपना तर्क दिया है. पार्टी के प्रवक्ता राज्यवर्धन राठौर ने का कहना है कि राज्य में सुरक्षा के मद्देनजर इतने चरणों में चुनाव कराया जा रहा है. पश्चिम बंगाल चुनाव में हिंसा भी एक फैक्टर है, इसका संकेत भी राज्यवर्धन ने दिया है. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है यह राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे हिंसक चुनाव हो सकता है. केंद्र सरकार की योजनाओं पर चुनाव होने दें. जनता खुद तय करे कि वह किसे चाहती है.’

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