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ओलंपिक खेलों में क्रिकेट क्यों नहीं है शामिल?

ओलंपिक खेलों के दौरान आप सबने महसूस किया होगा कि किस तरह से भावनाओं का उफ़ान ज़ोर लगाता है. खिलाड़ी अपने देश की प्रतिष्ठा के लिए हर मुक़ाबले में जी जान लगा देते हैं और जो लोग वहां तक नहीं पहुंचते वे भी टीवी पर नज़रें जमाए होते हैं.

टोक्यो ओलंपिक के दौरान भारतीय खिलाड़ियों के मुक़ाबले के दौरान ऐसा हर भारतीय खेल प्रेमी ने महसूस किया होगा. साथ ही एक सवाल कई भारतीय खेल प्रेमियों के मन में रह रहकर उमड़ा होगा.

अगर गूगल पर ओलंपिक लिखें तो उन सवालों की सूची उभर आती है जिन्हें भारतीय सर्च कर रहे थे. उनमें से एक बड़ा सवाल यही है कि ओलंपिक में अब तक क्रिकेट को क्यों नहीं शामिल किया गया है?

टोक्यो ओलंपिक में इस साल कराटे जैसे कुछ नए खेलों को शामिल किया गया और इसके बाद से ही ओलंपिक खेलों में क्रिकेट की प्रतियोगिताओं की गै़र मौजूदगी की चर्चा शुरू हो गई.

इससे पहले साल 2008 के बीजिंग खेलों में बेसबॉल को शामिल किया गया था. टोक्यो ओलंपिक में उसे एक बार फिर से ओलंपिक का हिस्सा बनाया गया है. यानी ओलंपिक में नए खेलों को शामिल किया जाता रहा है और पुराने खेलों को शामिल रखा जाता रहा है.

यही वजह है कि हाल में हुई घोषणा के मुताबिक ब्रेक डांस को 2024 के पेरिस ओलंपिक खेलों में शामिल किया जाएगा.

कुछ लोगों की माँग तो यहाँ तक है कि चीयरलीडिंग को भी ओलंपिक खेलों का दर्जा मिले. ऐसे में इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि भविष्य में इसे भी ओलंपिक खेलों में शामिल कर लिया जाए.

चीयरलीडिंग, बेसबॉल और स्केट बोर्डिंग या फिर सर्फ़िंग जैसे खेल दुनिया के सभी देशों में नहीं खेले जाते. इनमें से अधिकांश को अमेरिकी खेल माना जाता है.

अगर गिनती के देशों में खेले जाने वाले खेलों को ओलंपिक में जगह मिल सकती है तो फिर क्रिकेट इसमें शामिल क्यों नहीं है?

हालांकि कुछ लोगों की राय यह भी है कि ओलंपिक खेलों में क्रिकेट का नहीं होना अच्छा ही है क्योंकि ओलंपिक के दौरान ही ऐसा मौका आता है जब भारतीय खेल प्रेमियों का ध्यान क्रिकेट से हटकर दूसरे खेलों पर जाता है. एक हद तक ये बात बिल्कुल सही भी है.

वहीं, दूसरी ओर ऐसे लोग भी हैं जिनके मुताबिक़ क्रिकेट के ओलंपिक में शामिल रहने पर भारत को निश्चित तौर पर मेडल भी मिलता और इससे क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दूसरे देशों तक ले जाने में मदद भी मिलती.

इनमें कौन सी दलील सही है और कौन सी ग़लत, हम इसका आकलन भी नहीं कर रहे हैं, लेकिन हम आपको बताएंगे कि क्या कभी क्रिकेट ओलंपिक खेलों का हिस्सा था?

अगर हां तो कब और अगर नहीं तो अब तक क्यों नहीं हिस्सा बन सका? साथ ही हम आपको ये भी बताएंगे कि ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल करने को लेकर कितनी गंभीर कोशिशें हुई हैं.

पहले ओलंपिक खेल में क्रिकेट

जब ओलंपिक खेलों का आयोजन पहली बार 1896 में हुआ था तब उसमें क्रिकेट भी शामिल था, लेकिन कोई टीम ही हिस्सा लेने के लिए मौजूद नहीं थी इसलिए उसे रद्द करना पड़ा.

चार साल बाद 1900 के ओलंपिक खेलों में भी क्रिकेट शामिल था. यह ओलंपिक फ़्रांस की राजधानी पेरिस में हुआ था. ओलंपिक के इतिहास में क्रिकेट मुक़ाबलों का आयोजन महज एक बार हुआ है, वो भी इसी ओलंपिक के दौरान.

कितनी हैरानी की बात है कि जिस फ्ऱांस में ओलंपिक खेलों में क्रिकेट मैच का आयोजन हो चुका है, उस फ्ऱांस का मौजूदा समय में क्रिकेट से कोई लेना-देना नहीं है.

पेरिस में आयोजित ओलंपिक खेलों में 19 खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ था, उनमें क्रिकेट भी शामिल था. मुक़ाबले में चार टीमें शामिल थीं- नीदरलैंड्स, बेल्जियम, ब्रिटेन और फ़्रांस. चौंकिए नहीं, फ़्रांस की टीम भी ओलंपिक में क्रिकेट का मुक़ाबला खेल चुकी है.

मुक़ाबला शुरू होने से पहले अचानक बेल्जियम और नीदरलैंड्स ने अपना नाम वापस ले लिया. यानी मुक़ाबले में महज दो टीमें बचीं- ब्रिटेन और फ़्रांस. इन दोनों के बीच केवल एक मुक़ाबला खेला गया और उसे ही फ़ाइनल घोषित किया गया.

इस मुक़ाबले के नियम भी कुछ अलग थे. इन क्रिकेट टीमों के खिलाड़ियों की संख्या 11 न होकर 12 थी. आपको यह भी ध्यान होगा कि उस समय में केवल टेस्ट क्रिकेट यानी पांच दिनों तक चलने वाले मुक़ाबले होते थे, लेकिन ओलंपिक में इसका आयोजन महज़ दो दिनों तक चलने वाले मैच के तौर पर किया गया था.

इसके लिए ब्रिटेन ने अपनी नेशनल टीम नहीं भेजी थी बल्कि ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए स्थानीय क्लब स्तर की टीम भेजी गई थी. फ्ऱांस की टीम भी पेरिस में रहने वाले ब्रिटिश अधिकारियों को शामिल करते हुए बनाई गई थी.

दो दिन चलने वाले मुक़ाबले में ब्रिटेन ने फ्ऱांस को हरा दिया था. यह भी अचरज की बात है कि इस मुक़ाबले की विजेता टीम को गोल्ड मेडल नहीं मिला था. बल्कि ब्रिटिश टीम को सिल्वर मेडल मिला था और फ़्रांसीसी टीम को ब्रॉन्ज़ मेडल दिया गया था.

दोनों टीमों को स्मृति चिन्ह के तौर पर आइफ़िल टावर की तस्वीर दी गई थी. लेकिन सबसे रोचक बात यह थी कि इन दोनों टीमों को नहीं मालूम था कि वे ओलंपिक में हिस्सा ले रहे हैं.

दोनों टीमों को मुक़ाबले में उतरते वक्त यह मालूम था कि वैश्विक मेले के दौरान एक मैच में वे हिस्सा ले रहे हैं. दरअसल ओलंपिक खेलों के आयोजन के वक्त ही पेरिस में वैश्विक मेले का आयोजन भी चल रहा था.

ओलंपिक खेलों के आधिकारिक आंकड़ों में भी इस मुक़ाबले को 12 साल बाद शामिल किया गया और तब दोनों टीमों को गोल्ड और सिल्वर मेडल दिया गया.

पेरिस ओलंपिक खेलों में यह भी तय किया गया कि सेंट लुई में होने वाले तीसरे ओलंपिक खेलों के दौरान भी क्रिकेट शामिल होगा. मगर एक बार फिर इसमें शिरकत करने वाले देश नहीं मिले और इसके चलते क्रिकेट प्रतियोगिता को शामिल करने की योजना रद्द करनी पड़ी. उसके बाद अब तक ओलंपिक खेलों में क्रिकेट शामिल नहीं हो पाया.

लेकिन ऐसा क्यों हुआ, इसके बारे में खेल पत्रकार शरद कद्रेकर ने बताया, “जब आधुनिक ओलंपिक खेलों की शुरुआत हुई थी, तब उन लोगों ने पांच दिनों के मैचों के आयोजन के लिए जगह नहीं बनाई. उन दिनों केवल टेस्ट मैचों का चलन था. ओलंपिक में इतने लंबे मैच कराने के लिए व्यवस्था करना मुश्किल था. यह भी आशंका जताई गई थी कि ज़्यादा टीमों के हिस्सा लेने से यह और भी लंबा चलेगा. इसी वजह से ओलंपिक खेलों से क्रिकेट बाहर रहा.

ओलंपिक में कोई नया खेल कैसे शामिल होता है?

क्रिकेट को फ़ॉलो करने वाले लोगों की संख्या एक अरब से ज़्यादा है, लेकिन यह अभी कुछ ही देशों में लोकप्रिय है. ज़्यादातर क्रिकेट फ़ैंस भारतीय उपमहाद्वीप के देश भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश में मौजूद हैं.

भारत में क्रिकेट एक ‘धर्म की तरह’ है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केवल 10-11 देशों को टेस्ट क्रिकेट खेलने का दर्जा मिला हुआ है. इसका मतलब है कि इन्हीं देशों में क्रिकेट खेला जाता है.

क्या आने वाले दिनों में क्रिकेट ओलंपिक का हिस्सा बन सकता है. इस सवाल का जवाब जानने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि ओलंपिक खेलों में किसी नए खेल को कैसे शामिल किया जाता है?

हम जानते हैं कि हाल के दिनों में, बेसबॉल, स्केट बोर्डिंग और सर्फ़िंग को ओलंपिक खेलों में शामिल किया गया है.

पहले ओलंपिक में किसी भी खेल को शामिल करने का फ़ैसला अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) करती थी. लेकिन अब आईओसी ने ओलंपिक में किसी नए खेल को शामिल करने की ज़िम्मेदारी मेजबान देश के ओलंपिक आयोजन समिति को दे दी है.

यह बदलाव ओलंपिक 2020 एजेंडे के लागू होने के बाद किया गया है. इसका उद्देश्य ज़्यादा से ज़्यादा लोगों, ख़ासकर युवाओं तक पहुंचना है. टोक्यो ओलंपिक आयोजन समिति ने नए खेलों को टोक्यो ओलंपिक में शामिल करने का प्रस्ताव 2015 में दिया था.

आईओसी ने इस प्रस्ताव को 2016 में स्वीकार कर लिया था.

तब अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष थॉमस बाक ने कहा था, “हम खेल को युवाओं तक ले जाना चाहते हैं. युवाओं के पास अब कहीं ज़्यादा विकल्प मौजूद हैं, लिहाज़ा हम ये उम्मीद नहीं कर सकते हैं कि वे अपने आप हमारे पास आएंगे. हमें उनके पास जाना होगा. इसको ध्यान में रखते हुए जापान में लोकप्रिय पांच स्थापित और उभरते हुए खेलों को शामिल कर रहे हैं जो टोक्यो ओलंपिक की लेगेसी को बढ़ाएगा.”

हालांकि मेज़बान देश की आयोजन समिति किन खेलों को शामिल करने पर विचार कर सकती है, इसको लेकर कुछ प्रावधान हैं.

पहली शर्त तो यही है कि उस खेल की प्रतियोगिताओं को आयोजित करने के लिए मेजबान देश के पास पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए. इसके साथ ही मेज़बान देश में उस खेल को लेकर एक संस्कृति होनी चाहिए. इससे यह भी स्पष्ट है कि कोई खेल जो एक ओलंपिक में शामिल है ज़रूरी नहीं है कि वो अगले ओलंपिक खेलों में भी शामिल रहे.

क्या क्रिकेट को दूसरा मौका मिला मिलेगा?

2024 में ओलंपिक खेलों का आयोजन पेरिस में होना है और इसके बाद 2028 का ओलंपिक लॉस एंजेलिस में होगा. अमेरिका और फ़्रांस, दोनों देश क्रिकेट नहीं खेलते हैं.

इन दोनों देशों में क्रिकेट बहुत लोकप्रिय भी नहीं है. ऐसे में इन देशों में क्रिकेट के लिए ज़रूरी बुनियादी सुविधाएं और स्टेडियम का अभाव भी है.

इसलिए ये दोनों देश ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल करें, इसकी संभावना ना के बराबर ही है.

दूसरा रास्ता क्या हो सकता है?

इसके अलावा एक विकल्प यह हो सकता है कि इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) इस मामले में पहल करे. इसके लिए उसे क्रिकेट खेलने वाले देशों के बोर्ड का समर्थन हासिल करना होगा.

इन लोगों को आपस में फ़ंड जमा करके ओलंपिक खेलों की मेज़बानी कर रहे देशों को मुहैया करानी होगी ताकि वह क्रिकेट से जुड़ी सुविधाओं की व्यवस्था कर सके.

क्रिकेट बोर्ड को यह रकम जुटाने के लिए अपनी सरकारों से पैसा मांगना होगा और यह कोई आसान रास्ता नहीं है.

आईसीसी की कोशिश

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल, 2028 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक खेलों में क्रिकेट को शामिल कराने के लिए प्रयास कर रहा है. इसके लिए क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ानी होगी और आईसीसी ने इस उद्देश्य के तहत एक ओलंपिक कमेटी भी बनाई है.

पिछले साल अक्टूबर में आईसीसी ने सदस्य देशों से पूछा था कि अगर ओलंपिक खेलों में क्रिकेट को शामिल किया जाता है तो वे अपने देश की सरकार से कितनी वित्तीय सहायता हासिल कर सकते हैं.

आईसीसी ने अपने सदस्य क्रिकेट बोर्डों को सवालों की एक सूची भेजी थी.

वैसे आईसीसी ने ऐसी कोशिशें पहले भी की हैं, लेकिन उसमें कोई कामयाबी नहीं मिली. पर लॉस एंजेलिस ओलंपिक खेलों के लिए आईसीसी एक बार फिर कोशिशों में जुटा है.

आईसीसी का मानना है कि ओलंपिक खेलों में क्रिकेट के शामिल होने से विश्व भर में क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ेगी. सबसे अहम बात यह है कि इससे क्रिकेट देखने वाले दर्शकों की संख्या भी बढ़ेगी.

ऐसी ख़बरें भी आई हैं कि आईसीसी ने इस दिशा में एक प्रस्ताव भी तैयार किया है.

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘अगर ओलंपिक खेलों में क्रिकेट को शामिल किया जाता है तो ओलंपिक आंदोलन को अपने प्रशंसकों से जोड़ने के लिहाज़ से यह बेजोड़ मौका उपलब्ध कराएगा क्योंकि भारतीय उपमहाद्वीप में बड़ी संख्या में क्रिकेट फ़ैंस मौजूद हैं.’

आईसीसी के मुताबिक भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे ज़्यादा क्रिकेट फ़ैंस मौजूद हैं.

इस प्रस्ताव के मुताबिक़ दुनिया भर में एक अरब से ज़्यादा क्रिकेट फ़ैंस मौजूद हैं. इनमें 92 प्रतिशत फ़ैंस भारतीय उपमहाद्वीप के देशों (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका) में मौजूद हैं. ऐसे में क्रिकेट की लोकप्रियता से लॉस एंजेलिस ओलंपिक को भी फ़ायदा होगा.

क्या बीसीसीआई की दिलचस्पी ओलंपिक में नहीं है?

खेल पत्रकार शरद कद्रेकर का कहना है कि ऐसा नहीं है.

उन्होंने बताया, “क्रिकेट में मेडल से ज़्यादा भूमिका आर्थिक हितों की होती है. अगर क्रिकेट ओलंपिक में शामिल होता है तो क्रिकेट बोर्ड की ताक़त कम होगी. मसलन, ओलंपिक मैचों के प्रसारण का अधिकार उनके पास नहीं रहेगा, इससे उनकी आमदनी कम होगी.”

”इतना ही नहीं, क्रिकेट मैचों के आयोजन के लिए निवेश भी करना होगा. इसके अलावा ओलंपिक खेलों का आयोजन किसी दूसरी सिरीज़ के शिड्यूल से टकरा सकता है. यही वजह है कि अगर ओलंपिक में क्रिकेट शामिल भी होता है तो भी बीसीसीआई अपनी बी या सी या डी टीम ही ओलंपिक खेलों में भेजेगी.”

कद्रेकर के मुताबिक़ क्रिकेट का अपना शिड्यूल होता है, इसके अपने प्रायोजक और प्रसारण अधिकार होते हैं. आयोजकों की आमदनी होती है, ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए बीसीसीआई इन सबको छोड़ने की इच्छुक शायद नहीं होगी.

बीसीसीसीआई ही नहीं, दूसरे दो सबसे बड़े क्रिकेट बोर्ड- इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड ने भी कभी ओलंपिक खेलों में क्रिकेट को शामिल किए जाने का प्रयास नहीं किया है.

बीसीसीआई की तरह ही ये क्रिकेट बोर्ड अपने आर्थिक हितों को तरजीह दे रहे हैं, लेकिन इस स्थिति में बदलाव हो सकता है.

शरद कद्रेकर ने बताया, “इन देशों की दिलचस्पी ओलंपिक मेडल में हो सकती है. यही वजह है कि ओलंपिक खेलों में क्रिकेट को शामिल कराने का भाव इन देशों में बढ़ रहा है. अगर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल करने की मांग करेंगे तो आईसीसी को अपने प्रयासों में मदद मिलेगी. ऐसी स्थिति में बीसीसीआई को कोई और रास्ता तलाशना होगा.”

बीसीसीआई ओलंपिक को लेकर संतुलित स्टैंड लेता आया है. ना तो बीसीसीआई ने अब तक ओलंपिक खेलों में क्रिकेट को शामिल किए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया है और ना ही आधिकारिक तौर पर इस प्रस्ताव को स्वीकार किया है.

हालांकि बीसीसीआई ने यह ज़रूर कहा है कि अगर लॉस एंजेलिस ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल किया जाता है तो वो अपनी पुरुष और महिला टीम को भेजने के लिए तैयार है.

बीसीसीआई ने टोक्यो ओलंपिक की तैयारियों के लिए भारतीय ओलंपिक संघ को 10 करोड़ रुपये की मदद दी थी.

बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने एक बयान में कहा है, “बीसीसीआई ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले सभी एथलीटों की मदद के लिए अपनी और से बेहतरीन कोशिश करेगा. भारतीय ओलंपिक संघ और भारत सरकार के युवा एवं खेल मंत्रालय के अनुरोध पर ओलंपिक एथलीटों के लिए 10 करोड़ रुपये देने का फ़ैसला बोर्ड ने लिया है.”

क्या बड़े खेल आयोजनों में क्रिकेट शामिल रहा है?

राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और ओलंपिक ही दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन माने जाते हैं. इन आयोजनों में एक ही वक्त में काफ़ी मुक़ाबले चल रहे होते हैं. ये किसी भी खेल के विश्व कप से बेहद अलग होते हैं.

क्रिकेट एक बार कॉमनवेल्थ खेलों में भी शामिल रहा है. 1998 के कुआलालंपुर में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में क्रिकेट भी शामिल था. अजय जडेजा, सचिन तेंदुलकर, अनिल कुंबले और वीवीएस लक्ष्मण, हिस्सा लेने वाली भारतीय टीम में शामिल थे. लेकिन इसी दौरान एक दूसरी भारतीय टीम पाकिस्तान में सिरीज़ खेल रही थी.

हालांकि दोनों जगहों पर टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था. भारत की ओर से स्टार खिलाड़ी कुआलालंपुर में खेल रहे थे, लेकिन भारतीय टीम क्वार्टर फ़ाइनल में अपना मुक़ाबला हार गई थी. वहीं पाकिस्तान में भी टीम को सिरीज़ में क़रारी हार का सामना करना पड़ा था. इस कॉमनवेल्थ खेलों में क्रिकेट का गोल्ड मेडल साउथ अफ़्रीका को मिला था.

इसके बाद कॉमनवेल्थ खेलों में क्रिकेट कभी नहीं खेला गया. वैसे, इंग्लैंड के बर्मिंघम में आयोजित होने वाले 2022 कॉमनवेल्थ खेलों में अपनी महिला क्रिकेट टीम को भेजने की सहमति बीसीसीआई दे चुकी है.

जहां तक एशियाई खेलों की बात है, क्रिकेट 2010 और 2014 के एशियाई खेलों में शामिल था, लेकिन इन दोनों आयोजनों में भारतीय टीम ने हिस्सा नहीं लिया था.

2010 के एशियाई खेलों में क्रिकेट का गोल्ड मेडल बांग्लादेश ने जीता था जबकि 2014 में श्रीलंका ने गोल्ड मेडल हासिल किया था.

ओलंपिक में क्रिकेट का कौन सा फ़ॉर्मेट सबसे बेहतर होगा?

मौजूदा समय में क्रिकेट के तीन प्रारूप हैं- टेस्ट, वनडे और टी-20 क्रिकेट. इनमें से कौन सा प्रारूप ओलंपिक के लिए सबसे बेहतर साबित होगा?

शरद कद्रेकर कहते हैं, “टेस्ट मैचों का आयोजन तो असंभव ही है. ऐसे बड़े खेल आयोजनों में वनडे क्रिकेट मैच को शामिल करना भी बहुत मुश्किल है. इसके आयोजन के लिए समय के साथ-साथ आधारभूत सुविधाएं जुटाने की चुनौती होती है.”

ऐसे में टी-20 प्रारूप ही ओलंपिक खेलों में जगह बना सकता है. आईसीसी इसी प्रारूप के लिए कोशिश कर रही है. हाल के दिनों में एक और प्रारूप का चलन शुरू हुआ है, जिसे हंड्रेड कहा जा रहा है.

हंड्रेड का कांसेप्ट इंग्लैंड में शुरू हुआ है. इसका पहला टूर्नामेंट अभी-अभी ही इंग्लैंड में खेला गया है. हंड्रेड का मतलब 100 गेंदों के मुक़ाबले से है. इसमें टी-20 से प्रति पारी 20 गेंद कम होती हैं.

इंग्लिश क्रिकेट बोर्ड ने कहा है कि उन्होंने युवाओं और दूसरे लोगों को आकर्षित करने के लिए इस प्रारूप की शुरुआत की है. इस सिरीज़ के लिए इंग्लैंड के आठ शहरों की महिला और पुरुष टीमों के बीच मुक़ाबला हुआ. इस टूर्नामेंट के नियम भी क्रिकेट के नियमों से थोड़े अलग हैं.

कई लोगों का मानना है कि क्रिकेट के इस फ़ॉर्मेट से महिलाएं क्रिकेट में पुरुषों की बराबरी के स्तर पर आ पाएंगी. इस टूर्नामेंट के दौरान महिला खिलाड़ियों के मैचों को पुरुष खिलाड़ियों के मैच जितनी प्राथमिकता मिली. महिलाओं को पुरुषों जितनी सुविधाएं भी मुहैया कराई गई और अवॉर्ड की राशि भी दोनों के लिए बराबर है.

लेकिन कई लोगों का मानना है कि इस प्रारूप को ओलंपिक में शामिल नहीं किया जाना चाहिए. कुछ सीनियर क्रिकेटरों ने भी आपत्ति जताते हुए कहा है कि तीन प्रारूप के होते चौथे की क्या ज़रूरत है?

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर इयन चैपल ने कहा, “क्रिकेट की दुनिया में सबसे लोकप्रिय खेल टी-20 में से 20 गेंद कम करके ये लोग क्या हासिल कर लेंगे, यह मैं नहीं समझ पा रहा हूं.”

क्रिकेटर क्या सोचते हैं?

मौजूदा क्रिकेट खिलाड़ी क्रिकेट के ओलंपिक में शामिल किए जाने के मुद्दे पर ज़्यादा नहीं बोलते, लेकिन पूर्व क्रिकेटरों में इस मुद्दे पर मिली-जुली राय देखने को मिली है.

भारत के पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने बीबीसी के कार्यक्रम ‘स्टंप्ड’ में कहा था कि ”क्रिकेट को ओलंपिक खेलों में शामिल करने से क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ेगी. टी-20 सबसे लोकप्रिय प्रारूप है. जो लोग क्रिकेट को फ़ॉलो नहीं करते हैं वे भी इस प्रारूप को समझते हैं.”

वहीं पाकिस्तान के पूर्व कप्तान सलमान बट्ट के मुताबिक ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल कराने की इतनी कोशिशें क्यों हो रही हैं.

अपने यूट्यूब चैनल पर उन्होंने कहा, “क्रिकेट को ओलंपिक में होना चाहिए, यह कहना काफ़ी उलझन में डालने वाला है. इस पर इतना ज़ोर क्यों है? क्या दुनिया क्रिकेट के बारे में नहीं जानती है? कुछ लोग कह रहे हैं कि 10 ओवरों का मैच होना चाहिए, कुछ हंड्रेड की बात कर रहे हैं. लेकिन क्यों? दूसरे खेलों के लिए ज़्यादा कोशिश होनी चाहिए.”

ज़ाहिर है कि जब-जब ओलंपिक का आयोजन होता है तब ओलंपिक खेलों में क्रिकेट को शामिल करने की चर्चा ज़ोर-शोर से उठती है और ओलंपिक का आयोजन ख़त्म होते ही ये चर्चा भी ख़त्म हो जाती है.

लेकिन भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को उस दिन का इंतज़ार है जब विराट कोहली, रोहित शर्मा या फिर कोई अन्य क्रिकेटर ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में भारतीय झंडा लेकर दूसरे खिलाड़ियों के साथ मार्च करता नज़र आए और भारत के लिए मेडल जीते.

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