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अंतरिक्ष में स्थाई स्टेशन बनाने वाला चीन तीसरा देश, 2022 तक होगा संभव

अंतरिक्ष में अपना स्थायी स्पेस स्टेशन बनाने की कोशिश कर रहे चीन ने इस स्टेशन का एक अहम मॉड्यूल लॉन्च कर दिया है.

तियानहे मॉड्यूल में अंतरिक्ष स्टेशन पर काम करने वाले यात्रियों के रहने वाले क्वार्टर बने हैं. इसे लॉन्ग मार्च -5बी रॉकेट के ज़रिए वेनचांग स्पेस लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया गया.

चीन को उम्मीद है कि उसका नया स्पेस स्टेशन 2022 तक बन जाएगा.

अंतरिक्ष में इस वक्त पृथ्वी की कक्षा यानी ऑरबिट में सिर्फ़ एक ही स्पेस स्टेशन स्थित है जिसका नाम है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन और इसमें चीन को शामिल नहीं किया गया है.

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में चीन ने देर से शुरुआत की. उसने पहली बार 2003 में अपने अंतरिक्ष यात्री को ऑर्बिट में भेजा. वो सोवियत संघ और अमेरिका के बाद ये उपलब्धि हासिल करने वाला तीसरा देश था.

अब तक चीन दो स्पेस सेंटर टीयागॉन्ग-1 और टीयागॉन्ग-2 ऑर्बिट में भेज चुका है. हालांकि ये दोनों ही ट्रायल स्ट्रेशन थे जो कुछ देर ही कक्षाओं में टिक सकते थे.

लेकिन तियानहे कम से कम 10 सालों तक कक्षा में काम करता रहेगा.

चीन आने वाले साल 2022 तक 10 ऐसे ही और मॉड्यूल लॉन्च करना चाहता है जो 340 से 450 किलोमीटर की ऊंचाई से पृथ्वी का चक्कर लगाएंगे.

इस वक्त पृथ्वी की कक्षा में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन चक्कर लगा रहा है जिसका हिस्सा अमेरिका, रूस, कनाडा, यूरोप और जापान है. चीन के इसमें शामिल होने पर रोक लगाई गई थी.

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन 2024 में काम करना बंद कर देगा .ऐसे में उस वक्त चीन का तियानहे ही शायद इकलौता स्पेस सेंटर पृथ्वी की कक्षा में रह जाएगा.

चीन की अंतरिक्ष योजना

इस लॉन्च के एक महीने पहले ही चीन और रूस ने ऐलान किया था कि वह चांद की सतह पर एक साथ मिलकर एक स्पेस सेंटर बना रहे हैं.

चीन की अंतरिक्ष योजनाओं की जानकारी रखने वाले चेन लेन ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया था कि रूस के साथ चीन का साथ आना और ये प्रोजेक्ट एक ‘बड़ी बात’ है.

उन्होंने कहा था, ”यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चीन के लिए सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग परियोजना होगी. ‘

वहीं, अंतरिक्ष की खोज का अगुआ समझे जाने वाले रूस को हाल के वर्षों में चीन और अमेरिका ने पीछे छोड़ दिया है.

पिछले साल स्पेसएक्स के अंतरिक्ष यात्रियों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजे जाने के बाद से रूस ने ये एकाधिकार भी खो दिया है.

बीते कुछ सालों में चीन अंतरिक्ष की योजनाओं को लेकर अपनी महत्वाकांक्षाएं सार्वजनिक तौर ज़ाहिर करता रहा है. चीन अपनी अंतरिक्ष योजनाओं को बेहतर तरीक़े से पैसे भी दे रहा है.

राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों के अपना खुला समर्थन देते हैं और चीन का राष्ट्रीय मीडिया इस ‘स्पेस ड्रीम’ प्रोजेक्ट को देश के पूरी तरह बदल देने वाला क़दम बताता है.

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